यायावरी yayavaree: April 2016

Friday, 29 April 2016

किस्‍सा कश्‍मीर के ट्यूलिप गार्डन का - Story of Kashmir's Tulip Garden.


अमिताभ और रेखा की फिल्‍म सिलसिला 1981 में आई और हम 82 में आए....जैसे-जैसे बड़े हुए गीत-गज़ल समझने लग गए. एक रोज अमिताभ बच्‍चन और रेखा पर फिल्‍माया गया सिलसिला का वो सदाबहार गीत देखा एक ख्‍वाब तो ये सिलसिले हए..... वीसीआर के रंगीन पर्दे पर देख लिया. कमबख्‍त वो रंग बिरंगे ट्यूलिप के फूल दिल में उतर गए. हमने तो तब तक सबसे खूबसूरत फूल गुलाब ही देखा था सो बरसों तक उन ट्यूलिप को गुलाब ही समझते रहे. बाद में अनुभवी बड़कों ने बताया कि वो गुलाब नहीं ट्यूलिप हैं. जवानी की दहलीज पर कदम रखते हुए तो हम जैसे न जाने कितने ही युवाओं ने अपनी काल्‍पनिक प्रेमिकाओं के साथ उस काल्‍पनिक ट्यूलिप गार्डन में कल्‍पनाओं में ही ये गीत सैकड़ों बार गुनगुनाया था. अब आलम ये था कि गीत चाहे रेडियो पर बज रहा हो....या कोई गुनगुना रहा हो....कल्‍पना में गहरे रंगों वाले ट्यूलिप खुद ब खुद चले आते. 



अब क्‍या है कि ट्यूलिप अपने देश में तो देखने को भी नहीं मिलते. सो अनदेखे के प्रति स्‍वाभाविक ही जबरदस्‍त अनुराग हो गया. जो चीज महानगरों के रोज गार्डन या पुष्‍पवाटिकाओं में भी न हो वो सिर्फ जन्‍नत में ही हो सकती थी. यूं भी उस दौर में तो हर खूबसूरत जगह सिर्फ जन्‍नत ही लगती थी और जन्‍नत का मतलब हमें सिर्फ कश्‍मीर ही पता था. तभी एक दिन किसी छिद्रान्‍वेशी ने बताया कि ये गीत हॉलैंड में फिल्‍माया गया है. हमने हॉलैंड का सिर्फ नाम ही सुना था ये था किधर इसका इल्‍म नहीं था सिवाय इसके कि बहुत दूर है और अपन जा नईं सकते. बस इस सूचना ने सारी कल्‍पना का सत्‍यानाश कर दिया. साथ ही अबोध मन में सवाल चुभने लगा कि आखिर ट्यूलिप अपने कश्‍मीर में क्‍यों नहीं हो सकता? तब तक गूगल हमारी जि़दगी में नहीं आया था कि उससे पूछ लें या कहिए कि हम इत्‍ते बड़े नहीं हुए थे कि इंटरनेट के बिना रोटी हजम नहीं होती हो. 90 के दशक के उत्‍तरार्ध में भी इंटरनेट भी तो एक ख्‍वाब ही था...वही जन्‍नत जैसा. ये लग्‍ज़री थी जिससे हम यूनी‍वर्सिटी में पहुंचने तक महरूम थे. बस फिर समय के साथ हम पढ़ने-लिखने में खपने लगे और बात आई गई हो गई.



फिर समय का पहिया कुछ ऐसा घूमा कि ट्यूलिप अब हमारी अपनी जन्‍नत कश्‍मीर में ही खिलने लगे. वक्‍़त बदल गया. अब हिन्‍दुस्‍तानी अपने ट्यूलिप गार्डन में ही सिलसिला के अमिताभ और रेखा की तरह शरमाने और गुनगुनाने लगे हैं. भला हो जम्‍मू कश्मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री गुलाम नबी आजाद साहब का...अपन हॉलेंड नहीं जा सकते तो क्‍या....2007 में हॉलैंड से ट्यूलिप ही मंगवा कर यहां बाग तैयार कर लिया. बस सा‍हेबान ! तब से ट्यूलिप का बाग सजने का ये सिलसिला श्रीनगर में बदस्‍तूर जारी है। श्रीनगर तो यूं भी झीलों और मुग़लिया बाग़ों के लिए पहले से मशहूर था पर अब इस शहर की शानोशौकत में एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन चार चांद लगा रहा है. ट्यूलिप के ये फूल इस धरती के शायद सबसे नाजुक फूल हैं और इतने मिजाजी हैं कि साल में केवल दो महीने के लिए ही (मार्च के आखिरी सप्‍ताह से मई के अंत तक) खिलते हैं.
Tulip Garden

ट्यूलिप दरअसल सबसे पहले पर्शिया में पैदा हुआ और तमाम देशों से होता हुआ अब कश्‍मीर तक पहुंच चुका है। ये शहर यकीनन किस्‍मत वाला होगा जिसने अपने इन नायाब गुलों से ही पूरी दुनिया के लोगों को दीवाना बना दिया है। जबरवान पहाडियों की तलहटी में खूबसूरत डल झील के पास सजा ये ट्यूलिप गार्डन पहले सिराज़ बाग़ के नाम से जाना जाता था। बाद में जम्‍मू कश्‍मीर सरकार के पर्यटन विभाग ने इसे मॉडल फ्लोरिकल्‍चर सेंटर के रूप में विकसित किया और 2007 में जम्‍मू और कश्‍मीर के तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री गुलाम नबी की नज़रें इनायत हुईं तो ट्यूलिप गार्डन ही तैयार करा दिया। हर गुज़रते साल के साथ ट्यूलिप की खेती के लिए जमीन, ट्यूलिप की संख्‍या और किस्‍में भी लगातार बढ़ती गईं। लगभग 30 एकड़ में फैला ये ट्यूलिप गार्डन हर साल मार्च के अंतिम सप्‍ताह में खुलता है और तकरीबन दो महीने तक फूलों के कद्रदानों का पलकें बिछा कर स्‍वागत करता है। इस बार ये बाग गरमी जल्‍दी शुरू होने से 20 मार्च को ही खुल गया और 40 रंगों के लगभग 10 लाख ट्यलिप इस बार गार्डन में खिलेंगे. ये जरूरी नहीं कि हर कली पूरे दो माह तक खिली रहे इसलिए फूलों की खेती कुछ इस तरह की जाती है कि कुछ कलिया सीजन के शुरू में खिलें कुछ बीच में और कुछ सीजन के आखिर में...ताकि पूरे सीजन गुलों में बहार रहे.
ट्यूलिप गार्डन के प्रति दीवानगी को देखते हुए हर साल यहां ट्यूलिप फैस्‍टीवल का रंगारंग आयोजन होता है जिसमें यहां के हस्‍तशिल्‍प और लोक कलाओं को भी खूब बढ़ावा दिया जाता है. इस साल टयूलिप फैस्‍टीवल 7 से 14 मई के बीच आयोजित किया जाएगा. तो अभी भी देर नहीं हुई है....मई के आखिर तक ट्यूलिप वहां मुस्‍कुराते हुए नज़र आएंगे.  

Tulip Garden

Tulip Garden

Tulip Garden

Tulip Flawer
Lake inside Tulip garden

Beautiful Tulip Garden


Wednesday, 13 April 2016

एक बेहतरीन जायका....मैसूर का मद्दूर वडा - Maddur Vada

देश के कुछ बेहतरीन जायकों से मेरा परिचय अक्सर इत्तेफ़ाक़ से होता है. उस रोज बंगलोर एयरपोर्ट से मैसूर के लिए निकले घंटे हो चुके थे और लगातार बारिश और ठंडी हवा ने गाड़ी के अंदर ही हड्डियों में झुरझुरी सी भर दी थी. हमारी टीम के कुछ लोग कुछ महीने पहले इस रास्ते से गुज़र चुके थे सो उन्हें मंड्या के आस-पास किसी खूबसूरत रेस्तरां की याद थी जहां उन्हें स्वादिष्ट खाना-पीना मिल गया था. पर अब तो दरकार सिर्फ एक अदद चाय की थी. मंड्या में वो रेस्तरां भी मिल गया लेकिन ठीक उसी के सामने सड़क पर अपनी ओर ही एक ओर ढ़ाबे नुमा रेस्तरां था. हमें तो जल्दी से एक कप चाय पीनी थी सो गाड़ी किनारे लगा चाय ऑर्डर कर दी गई. मुझसे सूखी चाय गले से नीचे नहीं उतारी जाती...साथ में बिस्कुट या हल्का स्नैक चाहिए. पर इस रेस्तरां में बिस्कुट नाम की चिड़िया थी ही नहीं. फिर रेस्तरां के मालिक से पूछा कि ऐसा आपके पास क्या है जो चाय के साथ लिया जा सकता है. उन हज़रत ने मैसूर वड़ा के लिए सिफारिश की और इसकी रेसिपी पर दो लाइनों में चर्चा हुई और कुछ इस तरह मेरा एनकाउंटर हुआ "मैसूर वड़ा" के साथ. मैसूर-वड़ा नारियल चटनी के साथ परोसा गया था. हमें बाद में बताया गया कि इसे मद्दूर-वड़ा भी कहा जाता है और ये लाजबाव स्नैक मैसूर और बैंगलोर के बीच बहुत लोकप्रिय है. दरअसल हम बैंगलोर-मैसूर हाइवे पर थे और मद्दूर नाम की वो जगह पास ही थी जिसके नाम पर इसका नाम पड़ा. तो साहबमद्दूर या कहिए कि मैसूर वड़ा चावलमैदा के आटे से प्याजनारियलऔर खासतौर से दक्षिण भारतीय व्यंजनों में खास तौर से प्रचलित मसालों से तैयार किया जाता है. ये कर्नाटक का चखा जाने वाला पहला स्वाद था जो हमेशा याद रहेगा.

Tuesday, 12 April 2016

शिमला कैसे पहुचें और कहां ठहरें...एक मुफ़्त का मशविरा - All about Shimla

शिमला यात्रा का प्‍लान बनाने वालों के सामने पहला सवाल होता है कि शिमला पहुंचा कैसे जाए? तो साहब शिमला पहुंचने के कई तरीके हैं. सबसे रोमांचक और हसीन जरिया है (यदि आप दिल्‍ली से शिमला जा रहे हों तो) दिल्‍ली से सुबह 07.40 पर 'कालका शताब्‍दी' पकड़़ कर कालका रेलवे स्‍टेशन पहुंचा जाए और वहां से 52455 (हिमालयन क्‍वीन) ‪#Toytrain पकड़ कर शाम साढ़े पांच बजे के करीब शिमला पहुंचा जा सकता है. मगर इस चक्‍कर में एक पूरा दिन शिमला पहुंचने में खप जाता है. तिस पर इन दोनों ट्रेनों के कालका पहुंचने और कालका से शिमला के लिए छूटने में महज 25 मिनट का अंतर होने से थोड़ा रिस्‍क हो सकता है. इसलिए टॉयट्रेन का मजा शिमला से लौटते वक्‍त लिया जा सकता है. दूसरा तरीका है दिल्‍ली से रात 10-11 बजे के आस-पास ‪#Himachaltourism की बस (एसी/नॉन एसी सभी तरह की) या प्राइवेट टूर ऑपरेटर्स की बस पकड़ी जाए. इनमें आपको कभी भी सीट मिल सकती है. हांलाकि शिमला रूट पर ज्‍यादा ऑपरेटर्स नहीं हैं...इसलिए बेहतर हो समय रहते ऑनलाइन टिकट ले लिया जाए. बसें सुबह 7 से 8 बजे के बीच आपको शिमला पहुंचा देती हैं. इस तरह आपकी एक रात सफर में गुज़र जाती है और आप अगले पूरे दिन का इस्‍तेमाल घूमने फिरने में कर सकते हैं. आप चाहे ट्रेन (शताब्‍दी) से शिमला जाएं या बस (एसी) से खर्चा 1,000 रु. प्रति सवारी के आस-पास ही रहेगा. शिमला के सबसे नज़दीक चंडीगढ़ हवाई अड्डा है इसलिए देश में कहीं दूर से शिमला बाई एयर आने वाले लोग चंड़ीगढ़ तक आ सकते हैं और फिर वहां से सड़क के जरिए सोलन होते हुए ‪#Shimla.
शिमला में कहां और कैसे ठहरें ?
क्रिसमस के आस-पास का वक्‍़त शिमला का पीक सीजन का वक्‍़त होता है. अब एेसे समय में आप शिमला पहुंच कर होटल/रिजॉर्ट ढूंढ़ने की गलती न करें...खास तौर से तब जब आप परिवार या महिला मित्रों के साथ घूमने निकले हों. दिसंबर के आखिरी सप्‍ताह में क्रिसमस और न्‍यू ईयर सेलीब्रेशन के चलते शिमला के होटल लगभग 15 दिन पहले ही फुल होने शुरू हो जाते हैं. इसके लिए पहले से अपने स्‍टे का इंतजाम करके निकलें. 

अब मुद्दा ये है कि बिना ज्‍यादा जेब कटाए कैसे अपने होलीडे को एन्‍जॉय करा जाए. तो दोस्‍तो नीेचे के विकल्‍पों पर गौर फरमाएं:

1. अकसर होता यह है कि किसी भी श्‍ाहर की यात्रा का प्‍लान बनाते समय हम गूगल पर जाकर वहां अपनी पसंद के हिसाब से स्‍टार होटल खोजते हैं अौर फिर सीधे होटल से संपर्क करते हैं. मगर इस तरह हमें होटल के स्‍टैंडर्ड पैकेज मिलते हैं जिन पर किसी तरह का डिस्‍काउंट नहीं मिल पाता है. और होटलों की वेबसाइट पर हाई रेज्‍योल्‍यूशन तस्‍वीरें देखकर होटल के स्‍टैंडर्ड के बारे में धोखा भी हो जाता है इसलिए सीधे होटल बुक कराने के बजाण्‍ ‪#tripadvisor ‪#Goibibo जैसी साइटों पर होटलों का टैरिफ तुलना करके देख लें और खास तौर पर ट्रिप एडवाइज़र पर उस होटल के रिव्‍यू पढ़ लें. तस्‍वीर साफ हो जाएगी.

2. अब बात आती है, बजट होटलों की. यदि आप सस्‍ते में यात्रा का पूरा मजा लेना चाहते हैं तो यकीनन आस-पास के टूर ऑपरेटर्स की सेवाएं कारगर रहती हैं मगर यहां भी वे मुनाफा कमाने के लिए बैठे हैं और एक हद के बाद आपको डिस्‍काउंट नहीं दिला सकते. एक तरीका है. ‪#Holidayiq जैसी कुछ वेबसाइट पर जाकर आप अपनी डिटेल रजिस्‍टर कीजिए. कुछ ही देर में आपको कम से कम तीन टूर एजेंसियों से कॉल आ जाएगी. जो आप से आपकी खास जरूरतों को समझ कर अापके लिए कस्‍टम पैकेज तैयार करके ई-मेल करेंगे. अब इनसे आप मोल-भाव कर सस्‍ते से सस्‍ता पैकेज हासिल कर सकते हैं.
3. शहर के बीचों बीच, यानि कि मॉल रोड़ के आस-पास के होटल इन दिनों थोड़े मंहगे हो सकते हैं इसलिए यदि शहर के बीचों-बीच होटल नहीं भी मिल रहा है तो कोई बात नहीं....टूर ऑपरेटर या मीडिएटर साइट (होलीडे आईक्‍यू जैसी) के जरिए यदि मॉल रोड़ से 8-10 किलोमीटर दूर शहर के बाहरी हिस्‍सों में ठीक-ठाक होटल मिले तो भी कोई बुराई नहीं है. हां बस एक बात का ध्‍यान रखें, आपके पैकेज में टैक्‍सी शामिल हो. जिसके लिए दिन के हिसाब से 1000 रु. का खर्चा आता है.....(यदि चार लोगों के लिए पैकेज लिया गया हो तो यह खर्चा 250 रु. प्रति व्‍यक्ति ही आता है जो बहुत मामूली है). आप शिमला पहुंच कर टैक्‍सी ढूंढने के चक्‍कर में न पड़ें. एक कपल के लिए 8000 से 10000 रु. के तीन दिन और दो रात के एक मोडेस्‍ट पैकेज में बस/रेलवे स्‍टेशन से पिक एंड ड्रॉप फैसेलिटी, पूरे स्‍टे के दौरान कार, डीलक्‍स/सुपर डीलक्‍स रूम, ब्रेकफास्‍ट और डिनर आसानी से मिल जाएगा. जबकि मेक माई ट्रिप या टूर ऑपरेटर्स से यही पैकेज आपको 15,000 से 20,000 तक पड़ता है. मैं खुद होलीडे आईक्‍यू (http://www.holidayiq.com/) की सेवाएं ले चुका हूं और बहुत उम्‍दा रहीं.
4. यदि आप सरकारी सेवा में हैं तो शिमला में मॉल रोड़ पर होटल ग्रेंड एक अच्‍छा विकल्‍प है. ये कुल 300 से 600 रु. प्रति दिन के हिसाब से आपको मिल सकता है. इसकी बुकिंगhttp://holidayhomes.nic.in/ साइट से की जा सकती है. पेमेंट शिमला के पते पर की जाती है.
और अकेले घुमक्‍कड़ों के लिए जो जहान पड़ा है....जहां मर्जी ठहरो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में घूमो...ढ़ाबों और रेस्‍तरां में खाओ. मैं एक दोस्‍त को जानता हूं जो कुल 2000 रु. में तीन दिन शिमला का आनंद उठा कर लौट आया. तो आपको शिमला के लिए शुभकामनाएं.